शनिवार, 17 सितंबर 2011

लावारिस बच्चों को जल्द मिलेगी छत

- भोपाल में बालकों के लिए बाल गृह जल्द
- प्रदेश में हैं मात्र तीन बाल गृह
- स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे है लावारिस बच्चों का भविष्य
जितेंद्र सूर्यवंशी, भोपाल।

लावारिस एवं संदिग्ध अवस्था में यहां-वहां भटकने वाले बच्चों को जल्द ही
छत का सहारा मिल जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग भोपाल में बाल गृह
खोलने जा रहा है। भोपाल में पहले से बालिकाओं के लिए एक बालगृह है, लेकिन
नए बाल गृह में बालकों को रखा सकेगा। इसके लिए अयोध्या बायपास के पास
जमीन आवंटित कर दी गई है, यहां ५० बच्चे एक साथ रह सकेंगे। इस बाल गृह को
शासन द्वारा पब्लिक पार्टनरशिप के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके
भवन निर्माण के लिए भी शासन ने साढ़े तीन लाख स्र्पए की राशि स्वीकृत कर
दी है।
तो नहीं होंगे मजबूर
फिलहाल राजधानी में एक ही बालिका बालगृह होने के कारण बालिकाओं को तो
सहारा मिल जाता है, लेकिन लावारिस और संदिग्ध बालकों को छत नहीं मिल पा
रही है। मजबूरन यह बच्चे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड में भटकते रहते हैं या
फिर सार्वजनिक स्थलों को अपना आश्रय बनाते हैं। यही नहीं, कई बार तो
इन्हें कहीं आसरा नहीं मिल पाने के कारण यह मौत के भी शिकार हो जाते हैं।
चूंकि अब नए बाल गृह को स्वीकृति मिल चुकी है ऐसे में यह उम्मीद की जा
सकती है कि इन्हें यहां-वहां भटकने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे
भोपाल की बात करें तो ज्यादातर ऐसे लावारिस बच्चों का भविष्य स्वयंसेवी
संस्थाओं के भरोसे है, शासकीय उपेक्षा के चलते यह स्वयंसेवी संस्थाओं में
पनाह पाते हैं। बालक ही नहीं, बल्कि बालिकाएं भी स्वयंसेवी संस्थाओं
द्वारा शरण ली गईं हैं। इसकी वजह शासकीय स्तर पर प्रयास की कमी है,
क्योंकि भोपाल में जो बालिका बाल गृह स्थित है उसकी क्षमता महज ५०
बालिकाओं की है, बावजूद इसके यहां करीब ७० बालिकाओं को रखा गया है। भोपाल
में करीब दर्जनभर ऐसी स्वयंसेवी संस्थाएं हैं जहां इस तरह के बच्चों का
पालन-पोषण किया जा रहा है।
प्रदेश में मात्र तीन बाल गृह
वर्तमान स्थिति की बात करें तो पूरे प्रदेश में इस समय महज तीन ही बाल
गृह है। इनमें भोपाल में लड़कियों के लिए बालिका बाल गृह, जबकि लड़कों के
लिए उज्जैन और जबलपुर में बाल गृह हैं, जिनकी क्षमता ५०-५० बालकों की है।
यहां पूरे प्रदेशभर से पहुंचने वाले बच्चों की वजह से संख्या हमेशा १००
से अधिक ही होती है।
प्रदेशभर में १८ बाल गृह खुलेंगे
महिला एवं बाल विकास विभाग अब प्रदेश के १८ जिलों में बालक एवं बालिका
बाल गृह खोलने जा रहा है। इनमें भोपाल सहित इंदौर, ग्वालियर, खंडवा,
रीवा, झाबुआ, नरसिंहपुर, मंदसौर, शहडोल सतना समेत अन्य जिले शामिल हैं।
इन जिलों में बाल गृह खुल जाने से ऐसे बच्चों का भविष्य सुनिश्चित हो
सकेगा।
इनका कहना हैप्रदेश के बाल गृहों में लावारिस बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए
विभाग ने १८ जिलों में बाल गृह खोलने का निर्णय लिया है। इन्हें जल्द से
जल्द खोलने के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है।
- अनुपम राजन, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग

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